What is Vastu Shastra || वास्तु शास्त्र क्या है? ||

वास्तु शास्त्र क्या है? क्या महत्व है इस का हमारे जीवन में? क्यों जरूरी है इस का शुभ होना हमारे घर में?

आइए इसे एक प्राचीन कथा यानि एक दैवीय कहानी के जरिये से समझने की प्रयत्न करते हैं यह कहानी बोहोत पुरानी होने के साथ-साथ बहुत ही प्रचलित भी है | इसका हमारे हिन्दू ग्रंथों व पुराणों में विवरण  किया गया है |

आजकल की युवा पीढ़ी व् नौजवान लोग हो सकता है, वे इन कथाओं व् कहानियो के बारे में ना जानते हो | मेरी कोशिश यही रहेगी कि, इन प्रचलित कथा के माध्यम से “वास्तु क्या है?” मैं कुछ समझा पाऊं |

एक बार त्रेता युग में महादेव व अंधकासुर राक्षस के मध्य  किसी कारण से  युद्ध छिड़ गया | बहुत ही भयंकर  युद्ध हुआ जो काफी दिनों व् महीनो तक चलता रहा |युद्ध के दौरान महादेव व राक्षस दोनों के पसीने की बूंदें धरती पर जा गिरी, और उन दोनों के पसीने के मिलाँ न से एक अद्भुत अथवा अजीब प्राणी का अवतरण  हुआ |

जो दिखने में बहुत ही भयंकर प्रतीत हुआ था | जिसमें देव व् असुर दोनों के ही गण शामिल थे | वह प्राणी दिखने मात्र से ही  इतना भयानक व अद्भित था, की उसके सामने जो भी आ रहा था, वह उसे भक्षण करता जा था | इसे देखकर देव व् असुर दोनों ही भयभीत गए | और भगवान् ब्रह्मा जी के पास सहायता मांगने के लिए पहुंचे |

ब्रह्मा जी ने सभी को कहा की सब इसे उठाकर धरती पर उल्टा  करके फेको ल सभी ने वही किया जो की ब्रह्म देव ने करने को कहा l  तभी वह प्राणी एक गर्जना करते हुए बोलने लगा की मेरे साथ ऐसा करने का क्या अर्थ है व् मुझे किस बात का दंड दिया जा रहा है l

वह बोलै की मुझे देव व् असुरो के द्वारा उल्टा करके धरती पे गिराया गया  है | मुझसे क्या भूल हुई है, मेरे रहने अथवा वास करने के लिए मुझे कोई निवास स्थान भी नहीं दिया गया l तब ब्रह्माजी को उस पर दया आयी व् बोले  कि तुम्हारा नाम आज से “वास्तु पुरुष” है | और तुम सदा धरती अथवा भूमि पर ही वास करोगे |

तब ब्रह्मा जी बोले की आज से और कलि काल तक जब भी कोई  भी मनुष्य व् मानव जाती कोई नई सरचना या कोई निर्माण कराएगा , चाहे वो कोई भवननिर्माण हो, दुकान हो, मकान हो, कोई भी उद्योग हो, वह तभी सफल होगा, जब कोई तुम्हारा सम्मान पूर्वक स्थापित करेगा व पूजन करेगा | और आज से जहां पर तुम निवास करोगे वही “वास्तु” कहलाएगा | इस प्रकार से  वास्तु पुरुष को देव ब्रह्मा जी का वर अथवा वर दान प्राप्त हुआ |

हिन्दू शास्त्र के अनुसार वास्तु पुरुष घर में इस प्रकार से होता है की  जहां पर  उसका शीर्ष  होता है, वह ईशान कोण होता है, जहां पैर या पग होते हैं वह नेर्तृत्य कोण होता है | इसी प्रकारअग्नि,वायु, जल, पृथ्वी,व आकाश यह 5  तत्व ही वास्तु में शामिल होते हैं |

जब यह अगर ५  तत्व घर में ठीक तरह से बैलेंस होते हैं तो हमारे जिंदगी  सभी परेशानियां खुद-ब-खुद ख़तम होने लगती हैं | और इन्हीं 5  तत्वों से हमारा शरीर व् हमारी देह का निर्माण हुआ है| इसीलिए जब हमारे मकान व् घर में वास्तु संतुलित हो जाता है तो इसका अच्छा प्रभाव सीधा सीधा हमारे स्वास्थ्य और शरीर पर भी पड़ता है |

हमारे हिन्दू शास्त्र के अनुसार जीवन में वास्तु शास्त्र का बहुत ही अधिक महत्वता है |इसलिए प्रिय पाठको, जिस घर में हम रहते हैं या वास करते हैं, वहां का वास्तु शुभ होना बहुत ही अनिवार्य व महत्वपूर्ण है | घर में वास्तु देखने का पहला लक्ष्य यही है कि वहां सुख, समृद्धि, शांति यह तीनों बराबर ही  बनी रहे, मतलब की  आजीवन बनी रहे|

जब घर का वास्तु बैलेंस होता है या संतुलित होता है घर के मालिक व उसमें रहने वाले सभी लोग आजीवन स्वस्थ व् धन धान्य से परिपूर्ण रहते हैऔर लोगों की समृद्धि में भी वृद्धि होती रहती है |

इसलिए घर खरीदते समय घर का वास्तु शुभ है या अशुभ देखा जाता है, और यह हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है|

कैसा  होना चाहिये  वास्तु ||

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