|| इस तरह पीपल से होगी लक्ष्मी जी की प्राप्ति ||

रविवार के अलावा और किस दिन या किस समय पीपल पर जल नही चढ़ाना चाहिए या कब चढ़ाना चाहिए ।

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार पीपल सींचने का सम्पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इसे प्रतिदिन सींचे परन्तु इतवार यानि रविवार को नहीं l

रविवार को पीपल सींचना तो दूर इसके नजदीक यानि इसकी छाया में भी नंही जाना चाहिए l  क्युकी केवल रविवार को ही पीपल में लक्ष्मी माता की बड़ी बेहेन अलक्ष्मी अथार्त दरिद्रता का वास होता है l 

एक बात का विशेष ध्यान रखे की सूर्य निकलने से पहले भी पीपल नहीं सींचना चाहिए l याद रखे की सूर्य निकलने से पहले और सूर्य छिपने के बाद पीपल में अलक्ष्मी का वास होता है l और अब ऐसी परिस्थिति में कभी भी पीपल नहीं सींचे l 

शास्त्रो में इस विषय पर एक बेहद रोचक प्रसंग बताया गया है । जो इस प्रकार है| 

रविवार को पीपल की पूजा नहीं की जाती क्योंकि जब प्रभु नारायण हरी ने देवी लक्ष्मी से शादी करनी चाही  तो देवी लक्ष्मी ने इस बात के लिए इंकार कर दिया l

क्योंकि उनकी बड़ी बहन दरिद्रा का विवाह नहीं हुआ था। दरिद्रा की लगन से पहले देवी लक्ष्मी प्रभु नारायण से लगन नहीं कर सकती थी l 

तन नारायण हरी ने लक्ष्मी जी की बेहेन दरिद्र से प्रश्न किया की वो कैसा वर चाहती हैं।”तो दरिद्रा  बोली कि,” वह ऐसा वर चाहती हैं जो कभी पूजा-अर्चना ना करता हो l

और ऐसे जगह पर रहे की जहा कोई भी प्रभु भक्ति ना करता हो और ना ही किसी प्रकार का धरम कार्य करता हो l

तब श्री नारायण हरी ने उनके लिए दुःसह ऋषि नाम के वर चुन के लाये और दोनों को  विवाह के बंधन में बाँध दिया l  

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अब दरिद्रा ने अपने वर यानि पति के आगे भी यही शर्त रखी जो की नारायण हरी के आगे रखी थी l  अब क्या था ऋषि अपनी धरम पत्नी दरिद्रा के लिए ऐसा स्थान खोजने निकल पड़े l लेकिन उनको कही पर भी ऐसा स्थान नही मिला।

अब क्या था ,दरिद्रा अपने पति की दिन रात इन्तजार करते करते थक गयीं l और उनके वियोग में विलाप करने लगी l

जब नारायण हरी ने देवी लक्ष्मी के आगे लगन करने की बात दोबारा कही तो देवी लक्ष्मी ने अपनी बहन की गृहस्थी बसने तक इन्तजार करने को कहा l 

अब पृथ्वी पर ऐसा कोई जगह नहीं जहा पुण्य कार्य न होते हो l अब दरिद्रा का घर बसाने की जिम्मेदारी स्वम् नारायण हरी पर थी और उन्होंने अपने ही निवास स्थान पीपल को दरिद्रा को केवल रविवार को ही रहने अथवा निवास करने को दे दिया l  

अत: हर रविवार पीपल के नीचे अन्य देवी देवताओं व् लक्ष्मी जी का वास न होकर दरिद्रा का वास होता है। इसी कारन से पीपल की पूजा रविवार को वर्जित मानी जाती है।

विशेष:-

शनिवार को पीपल पर जल चढ़ाना सबसे ज्यादा फलदायी माना जाता है । और संध्या के समय एक आटे का चौमुख दीपक बनाये ओर पीपल के नीचे हर शनिवार को माँ लक्ष्मी को याद करते हुआ दीपक जलाएं |

ओर माँ लक्ष्मी से अपने घर स्थाई निवास करने की प्रार्थना करे | शीघ्र ही शुभ फल प्राप्त होगा व दरिद्रता का नाश होगा |

तुलसी के विषय मे महत्त्वपूर्ण बातें

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