Pooja Phal || इस तरह से पूजा करने से मिलेगा सम्पूर्ण फल ||

हमारे हिंदू शास्त्रों के अनुसार मंदिरों में पूजा करने का बोहोत विधान और नियम बताये गए है l घर में पूजा करते वक्त कोई पुजारी नहीं होता, जबकि मंदिर में पुजारी होते हैं l इसलिए घर में व्यक्ति अपनी भक्ति भाव को प्रकट करने के लिए अपनी श्रद्धा अनुसार पूजा करता है| 

 

इसलिए  भगवान का पूजन करते समय कुछ नियम का हमे अवश्य ही ख्याल रखना चाहिए।

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  1. सुर्य, गणेश, दुर्गा, शिव, विष्णु ये पंचदेव है । इनकी पूजा पाठ रोज़ाना एवं सभी शुभ कार्यो मे करनी चाहिए 
  1. घर में पूजा पाठ करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुँह करके बैठना चाहिए l घी का दीया , धूप तथा अगरबत्ती को अपने हाथ के दाए रखना चाहिए l और शंख, जलपात्र एवं बजाने वाली घंटी को बाए और ही रखे l 
  1. हमेशा याद रखे की दीये को दीये से भीड़ा के नहीं जलना चाहिए l और दीये सम संख्या में भी नहीं जलने चाहिए l अगरबती के स्थान पर धूप जलानी चाहिए l (अगरबती मे बांस का उपयोग होता है जो गलत है)
  1. कभी भी शुभ कार्य हो तो सिन्दूर रोली का तिलक करे l  तिलक करवाते समय सर अवश्य ही ढके l बिना नहाये धोये पूजा  पाठ में कदापि ना बैठे l 
  1. घर में कभी भी दो शिवलिंग, तीन गणेश, दो शंख, दो सुर्य, तीन दुर्गा, दो गोमतीचक्र, और दो शालग्राम नहीं रखें।
  1. सालिगराम जी  की मूर्ति जितनी छोटी हो गी वह उतनी ही ज्यादा फलदायक होगी ।
  1. घर में सोने व् चंाँदी  की धातु की मूर्ती शुभ मानी जाती है l
  1. हमेशा ही  कुश, कम्बल, मृगचर्म व रेशम का आसन प्रयोग में लाना चाहिये। बांस, मिटटी , पत्थर, घास, लोहा, प्लास्टिक, आदि का आसन उपयोग  नही करना चाहिए । 
  1. अपवित्र महिला का भगवान् के पूजा पाठ वर्जित होता है l
  1. भगवान विष्णु की पूजा मे अक्षत के स्थान पर सफेद तिल का उपयोग किया जा सकता है l  पूजा में टूटे हुए अक्षत नहीं चढ़ाना चाहिए।
  1. ताँबा धातु मंगलस्वरूप, पवित्र होता है और ये  भगवान विष्णु को बहुत प्रिये है । अतः जल, फल, नैवेध ताम्रपात्र मे ही रखना चाइये l
  1. तांबे के बरतन में कभी भी चंदन, दूध, दही या पंचामृत आदि नहीं बनाके डालना चाहिए ,क्योंकि वह मदिरा समान अभक्ष्य हो जाते हैं।

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  1. पूजा की सामग्री जैसे दूध , घी, पंचामृत को अंगुली डालकर नहीं मिलाना चाहिए l ऐसा करने से ये पूजा के लिए अपवित्र हो जाते है l
  1. आचमन हमेशा 3  बार करने का विधान हैं। इससे त्रिदेव ब्रह्मा-विष्णु-महेश का स्वरुप माना जाता है इससे त्रिदेव प्रसन्न होते है l दाहिने कान का स्पर्श यानि छूना  भी आचमन के बराबर  माना जाता हैं।
  1. भगवान की आरती के समय जो घंटा, नगारा, बजाय जाता है उससे वायुमण्डल में भ्रमण कर रहे कीटाणु नष्ट हो जाते हैं।
  1. भगवान के चरणों की 4 बार , नाभि की 2  बार , मुख की 1  बार आरती उतारकर, समस्त अंगों की 7 बार आरती उतारें।
  1. देवी देवताओ की भी ग्रंथो और पुराणों के अनुसार अलग अलग संख्या में परिक्रमा करनी बताई गयी है l
  1. हवन में अग्नि होने पर ही आहुति देंनी चाहिए । समिधा अंगुठे से अधिक मोटी नहीं होनी चाहिए तथा 10  अंगुल लम्बी होनी चाहिए। छाल रहित या कीड़े लगी हुई समिधा यज्ञ में वर्जित हैं।  
  1. मुँह से फुँक मार  कर अग्नि को नहीं जलना चाहिए । हवन की अग्नि को कपड़ा से हवा करने से रोग, धननाश, व् आयु का नाश होता है।
  1. पूजा का नारियाल कभी भी महिलाओ को नहीं तोडना चाहिए l
  1. सभी धार्मिक कार्य में  पत्नी को बाए अंग में  बिठाकर  पूजा करनी चाहिए। स्त्रियों के हमेशा बायें हाथ में ही रक्षा सूत्र बांधना चहिये ।
  1. यज्ञ या किसी हवन के पश्चात्  कोई भी वस्तु या दान-दक्षिणा दाहिने हाथ से ही देना चाहिए । 

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  1. याद रखे की कभी भी बड़ों को प्रणाम करते वक़्त  उनके दाय  पैर को दाहिने हाथ से और उनके बांये पैर को बांये हाथ से ही छूना चाहिए l कभी भी एक हाथ से प्रणाम नही करना चाहिए। और याद रखे की कभी भी सोए हुए व्यक्ति के पैर नहीं छूने चहिये l 

विशेष :-        प्रिय पाठकों वास्तु शास्त्र व हिंदू शास्त्र के अनुसार पूजा के दीये  की लौ को हमेशा पूरब की ओर रखने  से आयु में वृद्धि, पश्चिम की ओर रखने से दुख में वृद्धि, दक्षिण की ओर रखने से धन  हांनि, व् उत्तर की ओर रखने से धन लाभ होता है |

 

||इन मंत्रों से करे ग्रहों को प्रसन्न||

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