Maa दुर्गा के 32 प्रसिद नाम, बनेगे सारे काम ||

maa-durga-ke-32-naam-jisse-bante-sare-bigade-kaam

Maa दुर्गा के इन 32 नमो का जप करने से मिलती है माता की कृपा।  माता के इन 32 नामों  को पड़ने से व्यक्ति को हर परीक्षा में सफलता मिलती है क्योंकि माँ जल्दी इन नामों  से जल्दी प्रस्सन होती है | ॐ दुर्गा,  दुर्गतिशमनी,  दुर्गापद्विनिवारिणी,  दुर्गमच्छेदनी,  दुर्गसाधिनी,  दुर्गनाशिनी,  दुर्गतोद्धारिणी, दुर्गनिहन्त्री  दुर्गमापहा,  दुर्गमज्ञानदा,  दुर्गदैत्यलोकदवानला,  दुर्गमा,  …

Read moreMaa दुर्गा के 32 प्रसिद नाम, बनेगे सारे काम ||

Hanuman Satavan || श्री हनुमत्-स्तवन चौपाई ||

Hanuman-Satavan

॥ श्री हनुमत्-स्तवन चौपाई ॥   अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रण्यम । सकलगुणनिधान वानराणमधाश रघुपतिप्रियभक्त वातजातं नमामि ॥ गोष्पदीकृतारीशं मश्कीकृराक्षसम् रामायणमहामालारत्न वन्दे निलात्मजम ॥   More Mantras

Shivastak ||श्री शिवाष्टक||

Shivastak

|| श्री शिवाष्टक||  Jay Shiv शंकर, Jay गंगाधर, करुणाकर करतार Hare ।  Jay कैलाशी, Jay अविनाशी, सुखराशि सुखसार Hare ।।  Jay शशि शेखर, Jay डमरूधर, Jay Jay प्रेमागर Hare ।  Jay त्रिपुरारी, Jay मदहारी, अमित, अनन्त, अपार Hare ।  निर्गुण Jay Jay , सगुण अनामय, निराकार साकार Hare ।  पारवती पति har har शम्भो, पाहि …

Read moreShivastak ||श्री शिवाष्टक||

Shri Ram Vandna || श्री राम वन्दना ||

Ramayana Ki Mahatvata

॥श्री राम वन्दना॥ श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणं। नवकंज लोचन, कंज-मुख, कर-कंज, पद कंजारुणं।। कंदर्प अगणित अमित छवि, नव नील-नीरद सुन्दरं। पटपीत मानहु तड़ित रुचि, शुचि नौमी जनक सुतावरं। भजु दीनबन्धु दिनेश, दानव-दैत्यवंश निकंदनं। रघुनन्द आनन्दकंद कौशल, चंद दशरथ नन्दन।। सिर मुकुट कुण्डल तिलक, चारु उदारु अंग विभूषणं। आजानुभुज शर-चाप धर, संग्राम – …

Read moreShri Ram Vandna || श्री राम वन्दना ||

||इन मंत्रों से करे ग्रहों को प्रसन्न||

in mantron se kare grahon ko prasann

सूर्य देव का मंत्र – ऊँ सूर्याय नम:। सूर्य को जल चढ़ाते समय इन मंत्रो को पूरी श्रध्द्दा व् एकचित होकर जपे l इससे समाज में मान सम्मान बढ़ता है l चंद्र देव का मंत्र –  ॐ सोमाय नम:। इस मन्त्र का अधिक फल पाने के लिए चन्द्रमा को रात में चांदी के पात्र से …

Read more||इन मंत्रों से करे ग्रहों को प्रसन्न||