Mahamrityunjaya Mantra’s Benefit || महामृत्युंजय मंत्र का चमत्कारी लाभ ||

महामृत्युंजय मन्त्र का लाभ व्  चमत्कार हमारे पुराणों और शास्त्रों में असाध्य रोगों से मुक्ति पाने और अकाल मृत्यु को टालने के लिए बताया गया है l  यह मन्त्र मनुष्य को ना ही केवल मृत्यु के डर से निजात दिलाता है, बल्कि उसकी अकाल मोत को भी टाल देता है l   

इस मन्त्र का सवा लाख बार निरंतर स्वं जाप करने से किसी भी रोग या अनिष्टकारी ग्रहों के दुष्प्रभाव को बिलकुल समाप्त किया जा सकता है | इस मन्त्र की शक्ति से आत्मा के कर्म शुद्ध व् बलवान हो जाते हैं और तो और आयु व यश में भी वृद्धि होती है l 

कल्याणकारी मंत्र:- 

ऋग्वेद व् यजुर्वेद का प्रसिद्ध और सिद्ध मन्त्र महाम्रत्युन्जय है । आसान मन्त्र ॐ है तो सारी विपदाओं से मुक्ति करता है ये महामंत्र महामृत्युंजय मंत्र। यह मृत संजीवनी के सामान शक्तिशाली है। मार्कण्डेय ऋषि को भी  इसी महा मंत्र ने छोटी उम्र से जीवन संजीवनी दी थी। यमराज भी उनके द्वार आकर खली हाथ वापस चले गए थे।

‘ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥’

इस महामंत्र में आये हुए अंतिम अक्षर माऽमृतात पर विशेष ध्यान दे l  इसे हमेशा ही सबसे ज्यादा ध्यान से पढ़ना चाहिए। क्युकी जैसा मन्त्र में भी इसका अर्थ  स्पष्ट है- की यह माऽमृतात केवल उसी परी स्थिति में पढ़ा जाए, जब किसी भी मनुष्य को मोक्ष नहीं मिल रहा होअथवा उसके प्राण नहीं छूट रहे हों।

उस मनुष्य की उम्र लगभग पूरी  हो गई हो। और मृत्यु की कामना वर्जित है। जीवन अथार्त जिंदगी की उम्मीद  करना अमृत होता है।

लेकिन ऐसे भी समय  आते हैं जीवन में , जब आदमी मृत्युशैया पर होता है, परन्तु परमात्मा से बुलावा नहीं आता, मतलब किउसके प्राण नहीं छूटते । तब इस शक्तिशाली महामंत्र को  पढ़ा जाता है।

जीवन में अमृत प्राप्ति, विपदाओं व् बीमारियों से निजात के लिए ,और जीवन में धन-यश-सुख-समृध्दि  के लिए इसे माऽमृतात ( मा+ अमृतात) को पढ़ा जाता है। इसके  जाप की संख्या हमेशा ही 108 होनी चाहिए।

Mahamrityunjaya-Mantra-ka-chamatakari-labh

क्यों है ये महामंत्र: 

इस शक्तिशाली महामंत्र में बत्तीस शब्द हैं। ‘ॐ’ लगा देने से तैत्तीस  शब्द हो जाते हैं। इसे तैंतीस अक्षरी मन्त्र भी कहा जाता हैं। मुनि वशिष्ठजी ने इन तैतीस  शब्दों के तैतीस देवी देवता अर्थात् शक्तियां को परिभाषित की या गया हैं। इस मन्त्र  में आठ वसु, ग्यारह रौद्र , बारह आदित्य और एक वषट हैं।

महामृत्युंजय के भिन्न भिन्न मन्त्र हैं। अपनी सुविधा या आसानी के अनुसार जो भी मन्त्र आप चाहें चुन लें और रोज़ाना नाहा धोकर नित्य प्रतिदिन पाठ अवश्य करे l या आवशकता अनुसार उपयोग में लाये l अद्भुतऔर चमत्कारिक लाभ मिलते  है, जिनका विवरण करना भी आसान नहीं l सभी मन्त्र  नीचे दिए जा रहे हैं उन्हें एकाग्रचित होकर ही पढ़े l

संपुट मंत्र इस प्रकार से है –

संजीवनी मंत्र:

ॐ ह्रौं जूं स:। ॐ भूर्भव: स्व:। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्। स्व: भुव: भू: ॐ। स: जूं हौं ॐ।

कालजयी मंत्र:

ॐ ह्रौं जूं स:। ॐ भू: भुव: स्व:। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्। स्व: भुव: भू: ॐ। स: जूं ह्रौं ॐ॥

ये दोनों ही मन्त्र नौकरी करने वाले लोगो व् बीमारियों से निजात पाने व् शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चो के लिए रोज़ाना ही पठन किया जाना चाहिए l शीघ्र ही लाभ मिलता है l

विशेष:-

प्रिय पाठकों महामृत्युंजय मंत्र को जो भी जाप करे। उसके उच्चारण का ठीक ढंग से यानी की शुद्धता के साथ जाप करें | एक बात ध्यान रखें कि इस मंत्र का जाप एक निश्चित संख्या के अनुसार ही करे यानि की संख्या निर्धारण करके ही जाप करें |

और अगले दिन इसकी संख्या आप चाहे तो बढ़ा सकते हैं, परंतु कम कदापि  ना करें | और इस मंत्र का जाप रुद्राक्ष माला से ही करें|

 

More Vastu Tips

Leave a Comment

%d bloggers like this: