किस तरह पाये शनिदेव की कृपा व इस प्रकार बनाये अपना रक्षा बंधन शुभ ll

स्कन्द पुराण व् ब्रह्म पुराण के अनुसार एक सो अठारह वें अध्याय में श्री शनिदेव कहते हैं- ‘मेरे दिन यानी शनिवार के दिन जो कोई भी इंसान रोज़ाना पीपल के पेड़ को सींचेगा व् उसकी गीली मिटटी का तिलक करेगा ,उसके सभी मनोरथ पूर्ण होंगे व् उसके कार्य में कभी भी कोई रुकावट नहीं आएगी l 

और उस मनुष्य को मेरी और से कोई पीड़ा नहीं आएगी lइसलिए शनिदेव की कृपा पाने के लिए जो कोई भी लोग शनिवार के दिन पीपल की पूजा करते है

व् संध्या काल में दीप प्रज्ज्वलित करते है उन्हें शनि देव की तरफ से कोई ग्रह जन्य पीड़ा नहीं सताती है l और इस प्रकार उन्हें शनिदेव की कृपा मिलती है l  

र एक उपाय अवश्य करे की शनिवार के दिन पीपल के पेड़ को जल चढ़ाते समय ॐ शं शनिश्चराय नमः मन्त्र का जाप करे l

ऐसा करने से आपकी की गयी पूजा का फल दोगुना मिलता है l और शनिदेव शीग्र प्रसन्न होकर आपके गृह पीड़ा और आने वाले संकट को कम कर देते है l तो इस प्रकार से आपको शनिदेव की हर कृपा मिलती है l 

किस प्रकार बनाये अपना रक्षा बंधन शुभ 

रक्षाबंधन यानि राखी के दिन 3 अगस्त को सुबह 9 बजकर 29 मिनट तक भद्रा काल रहेगा। इस समय राखी नहीं बांधनी चाहिए व् अन्य शुभ कार्य भी वर्जित होते है भद्रा काल में ।

रावण सहित के अनुसार कहा जाता है कि रावण की बहन ने भी भद्रा काल में ही रावण को राखी बांधी थी, जिसके फलसवरूप रावण का विनाश हो गया था ।

इन बातो को धायण में रख कर आप भी अपने रखा बंधन को शुभ बना सकते है l 

ध्यान रखे राखी बाँधने का शुभ मुहूर्त :-

राखी का पर्व सुबह 09:30 बजे से आरंभ होगा। दोपहर में 01:35 बजे से लेकर शाम को 04:35 बजे तक का समय राखी बांधने के लिए अति शुभ है। इसके बाद शाम को 07:30 बजे से 09:30 बजे तक राखी बांधने के लिए मुहूर्त शुभ रहेगा।

 सावन के महिने में रक्षाबंधन की पूर्णिमा यानि पूरनवासी को 03 अगस्त 2020 सोमवार वाले दिन वेदों व् पुराणों में नौ प्रकार का स्नान करना  बताया गया है |

परन्तु यह सब हमारे पुराणों के अनुसार भारत वर्ष में हमारे ऋषि मुनियो द्वारा किया जाने वाला स्नान बताया जता है l 

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भस्म स्नान –

उसके लिए यज्ञव हवन की भस्म जरा सी लेकर वो मस्तक पर तथा थोड़ी सी अपनी देह व् अंगो पर लगाकर स्नान किया जाता है |

यह भस्म स्नान कहा जाता है l यज्ञ की भस्म ही पवित्र बताई जाती है l  

गोमय स्नान –

गोमय स्नान के लिए गौ माता का गोबर और उसमे जरा सा गोझरण डाल के अपने देह पर लेप करना होता है l वेदो व् पुराणों में गौ माता के गोबर केवल देसी गाय के गोबर में देवी लक्ष्मी जी का वास माना जाता  है l 

पंचगव्य स्नान –

देसी गाय का गोबर, गोमूत्र,देसी  गाय के दूध के दही,देसी  गाय का दूध और घी ये पंचगव्य बनाकर स्नान करना |

ये पंचगव्य स्नान करने का अर्थ है की पाँच तत्व से हमारा शरीर बना हुआ है वो स्वस्थ रहें,हृष्ट – पुष्ट रहें, ताकतवर रहें ताकी हम लोग अपने जीवन में तरक्की करते रहे,l 

गोरज स्नान –

देसी गायों के खुरो की मिटटी  थोड़ी सी ले के और वो अपने देह पर लगा के स्नान कोइया जाता है | गवां ख़ुरेंम ये वेद व् पुराणों में भी आता है l  दशविद स्नान | 

धान्यस्नान –

जो हमारे गुरुदेव जो स्नान की बात बताते हैं | वो इस प्रकार है की ,गेंहूँ, अक्षत , जौ, चना, सफेद व् कला तिल, उड़द और मुंग ये सात चीजे यानि सात प्रकार के धान्य मिलाकर स्नान करना ही धान्य स्नान कहलाता है | 

फल स्नान –

वेदो में कहा जाता है की फल स्नान मतलब कोई भी फल या फ्रूट का थोडा सा रस अपनी देह के लगा लो |

और कोई फल ना मिले तो केवल आँवला फल ही लगासकते हो l इसका मतलब है की हमारे जिंदगी में हमें अनंत फल की प्राप्ति हो और सांसारिक रूपी  फल का मोह छूट जाए l  

सर्वोषौधि स्नान –

सर्वोषौधि यानि की आयुर्वेदिक औषधि का स्नानl  इस स्नान में कई जड़ीबूटी प्रयोग में आती हैं l उसमे दूर्वा, सरसों, हल्दी, बेलपत्र ये सब डालते हैं और इन सबका थोडासा पाऊडर बना कर देह पर लेप करके स्नान ,िया जाता है l 

कुशोधक स्नान –

कुश होता है वो थोडा पानी में मिला लो और थोडा पानी हिला दो l क्योंकि जो अपने घर में कुश रखते हैं ना तो उनके पास कोई दुष्ट आत्माएँ व् नेगेटिव एनर्जी नहीं आ सकती है l भूत, प्रेत आदि ऐसे घर से भी दूर रहते है l

हिरण्य स्नान –

हिरण्य स्नान यानि की अगर पास कोई सोने की चीज अंगूठी वगैरह है, तो नहाने के पानी में दाल कर स्नान करना ही हिरण्य स्नान कहलाता है | 

विशेष :-     

तो ये दशविद स्नान वेद व् पुराणों में बताया गया है जो की आज मैंने आपको बताया है l सावन  के महीने में के पूर्णिमा यानि की पुरनवासी का दिन किया जाता है |

आप लोग इन स्नानो में से जितना कर सकते है कर लो l और अपने जीवन में किये गए पुण्यो का कई गुना फल प्राप्त कर सकते है l 

 

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