गणेश चतुर्थी का पूजन व महत्व ||

गणेश चतुर्थी को कई जगह संकष्ट चतुर्थी व् गणेश चौथ के नाम से भी जाना जाता है गणेश जी को विनायक भी कहते हैं l  

 गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे भारत में बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है यह अब भारत में ही नहीं बल्कि बाहर विदेशों में भी मनाए जाने वाला पर्व हैl 

इस दिन गणपति जी का जन्म दिवस होता है l हिन्दू धर्म के अनुसार गणपति जी को विघ्न व् संकट हरता कहा जाता है इनकी पूजा पाठ से सभी विघ्न बाधाएं समाप्त हो जाती हैं l और किसी भी मांगलिक कार्यों में गणपति जी का नाम व पूजा सर्वप्रथम की जाती है l इसलिए पूरे हिन्दुस्तान में संकष्ट चतुर्थी अथवा गणेश चतुर्थी मनाई जाती है l 

गणेश जी को विनायक भी कहा जाता है इसका अर्थ है विशेष या विशिष्ट नायक l गणपति जी को दूर्वा भी अत्यधिक प्रिय है, इसलिए गणपति जी की पूजा पाठ में दूर्वा  का विशेष तौर पर महत्व रहता है l  दूर्वा  के बिना तो गणपति जी पूजा ही स्वीकार नहीं करते हैं l 

 गणपति जी की पूजा हो और भोग  में मोदक ना हो ऐसा कभी हुआ है क्या l  मोदक शब्द का अर्थ है मौद  व् आनंद l  तो जब गणपति जी को प्रसन्न करना हो तो उन्हें मोदक का भोग अवश्य ही लगाना चाहिए, ये बात अवश्य ही सभी भक्त जन याद रखे l 

गणपति पूजा के लाभ व परंपराएं :-

हमारे हिंदू धर्म के अनुसार गणपति जी कुशाग्र बुद्धि देने वाले एकमात्र ऐसे भगवान हैं जिनकी पूजा करने से बुद्धि बल तेज होती है, और मन स्वच्छ होता है l 

और गणेश चौथ को सभी लोग विशेषतौर से पूजा करते है l इसके अनुसार सभी लोग धूमधाम से गणपति जी की मिट्टी की मूर्ति को पूरे विधि विधान सहित अपने घर लाते हैं l और ग्यारह  दिन उनकी पूजा व आराधना बहुत ही धूमधाम से की जाती हैं l 

इसके पश्चात ग्यारवे  दिन में गणपति जी को किसी भी तालाब या बहते जल में पूरी श्रद्धा व् विधि विधान सहित विसर्जित कर देते हैं l और अगले साल जल्द ही आने की प्रार्थना भी करते हैं l यही  हिन्दुस्तान में गणेश चतुर्थी की प्राचीन परम्परा है l  

कहा जाता है कि ऐसी मान्यता है, गणपति जी जाते हुए अपने सभी भक्तों की हर मांगी हुई मनोकामनाएं पूर्ण करके जाते हैं l 

गणेश चतुर्थी का प्रारंभ समय वह समाप्ति समय :-

21 अगस्त  2020 को 11:00 बजे दोपहर से गणेश चौथ की तिथ  प्रारंभ हो जाएगी l और 22 अगस्त 2020 7:57 पर शाम को समाप्त हो जाएगी l 

तो सभी भक्त इसी बीच गणपति जी को घर में लाकर बैठाए l शुभ समय में लाये गणपति पूजन से अधिक से अधिक फल प्राप्त होगा l

विशेष :-

तो प्रिय पाठको ! हिन्दू धर्म के अनुसार गणपति जी का जन्म, दिन यानी दोपहर के समय हुआ था l  इसलिए उनकी पूजा गणेश चौथ वाले दिन ही सुबह या दोपहर तक कर ली जाती है l इसलिए प्रयत्न करे की सुबह से दोपहर के बीच शुभ मुहूर्त में गणपति विराजित करके अधिक से अधिक लाभ उठाये l इस दिन रात को चन्द्रमा दर्शन वर्जित माना  जाता है l चन्द्रमा के दर्शन रात्रि साढ़े नौ बजे के बाद निषेध है l 

 

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