एकादशी व्रत क्या है? व्रत के फायदे और पूजा विधि ||

एकादशी व्रत का महत्त्व :-

सभी वरतो में एकादशी का व्रत उत्तम व महान कहा गया है | हर महीने में 2  एकादशी आती  है|  यानि के पुरे साल में चौबीस एकादशी होती  है | और एकदाशी के वरतो में निर्जला एकादशी वरत को सबसे उत्तम माना गया है|

हिन्दू शास्त्र के अनुसार ,माना जाता है की जो मनुष्य श्रद्धा-भगति से इस वरत को करता है उसे सारी एकादशी वरत में मिलने वाला फल प्राप्त होता है | वह सभी प्रकार की समस्याओँ से छुटकारा मिलता है |

वरत के साथ-साथ इस दिन दान-पुण्य कार्य भी किया जाता है |  इस दिन जल से भरा कलश दान करना बहुत ही शुभ  माना  जाता है | ज्येष्ठ महीने में जब गरमी अपने चरम पर होती है, जब यह वरत होता है |

ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी है, जो दो जून को आ रही है| इसे भीम-सेनी, भीम और पाण्डव एकादशी भी कहते है|

इस व्रत में 

पानी वर्जित होता है l :- 

जैसा की नाम से ही स्पष्ट होता है निर्जला यानि इस वरत में पानी ग्रहण नहीं किया जाता है इसीलिए इसे निर्जला वरत कहा जाता है.पानी के साथ-साथ अन्न भी खाया जाता है |

इतना ही नहीं इस व्रत में कड़े नियमों का पालन किया जाता है | जिस वजह से वरत सबसे कठिन वरत कहा जाता है l 

वरत के लाभ:- 

इस वरत की मान्यता है कि निर्जला एकादशी का वरत जो भी रखता है उसे 24 एकादशी के वरतो के बराबर फल मिलता है l इस वरत को पूर्ण करने से  भगवान नारायण हरी प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा प्राप्त होती है|

इस व्रत को करने से जीवन में आ रही समस्याए, दुःख दरिद्रता बीमारी दूर हो जाती है l  और सुख शान्ति बनी रहती है और घर में देवी लक्ष्मी का निवास होता है l

व्रत की विधि:- 

यह बरत तारिख व् तिथ के अनुसार शुरू  करना चाहिए| एकादशी का वरत  दशमी की तिथि से ही शुरू  हो जाता है| इस वरत  में सूर्योदय यानी सूर्य निकलने के पश्चात से लेकर दुसरे  दिन की  द्वादशी तिथ के सूर्य उदय यानी सूर्य निकलने तक पानी और भोजन यानि अन्न ग्रहण नहीं किया जा सकता है|

पूजा विधि:- 

प्रातः जल्दी उठकर नाहा धोकर वरत का संकल्प लेकर ही वरत की शुरूआत करें | इसके प्श्चायत भगवान नारायण हरी की सबसे प्रिय वस्तुओं को चढ़ाये और उनका भोग लगाएं, और भोग के लिए हमेशा पीले  रंग के कपडे अथवा वस्त्र  और पीले रंग की ही मिठाई का भोग लगाना सर्वोत्तम  माना जाता  है| इसके प्श्चायत ही पूजा पाठ  शुरू करें और व्रत का विधि विधान से पालन करें|

विशेष :-

तो प्रिय पाठकों  निर्जला एकादशी का व्रत पूरे विधि विधान से करने से व्यक्ति को दीर्घ आयु और मोक्ष की प्राप्ति होती है | नारायण हरी की कृपा से व्यक्ति वैकुण्ठ धाम को जाता है | अगर आप ,सभी एकादशी न कर पाये  तो निर्जला एकादशी अवश्य करे, इस को  व्रत करने से  सभी एकादशी का पुण्य मिलता है |

 

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